शिव का नैवेद्य ग्रहण नहीं करना चाहिए? शास्त्र क्या कहते हैं और बिल्व की महानता | shiv ka naivedy grahan nahin karana chaahie? shaastr kya kahate hain aur bilv kee mahaanata
शिव का नैवेद्य ग्रहण नहीं करना चाहिए?शास्त्र क्या कहते हैं और बिल्व की महानता
शिव नैवेद्य ग्रहण का महत्व और शास्त्रीय दृष्टिकोण
ऋषियों का प्रश्न
सूत जी का उत्तर
सूत जी ने कहा: "हे मुनियों! आप सभी शिव व्रत का पालन करने वाले हैं। इसलिए मैं आपको प्रसन्नतापूर्वक इस विषय पर बताता हूँ। भगवान शिव के भक्तों के लिए जो उत्तम व्रत का पालन करते हैं, शिव नैवेद्य ग्रहण करना पवित्र माना गया है।"
शिव नैवेद्य ग्रहण करने के लाभ:
नैवेद्य को देखने मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं।
नैवेद्य को ग्रहण करने से हजारों और अरबों यज्ञों का पुण्य प्राप्त होता है।
जिस घर में शिव नैवेद्य ग्रहण किया जाता है, वह स्थान स्वयं तो पवित्र होता ही है, साथ ही अन्य घरों को भी पवित्र करता है।
भक्तिपूर्वक एवं श्रद्धा से इसे ग्रहण करने वाला मोक्ष को प्राप्त करता है।
शिव नैवेद्य को लेने में विलंब करने वाला व्यक्ति पाप का भागी बनता है।
शिव दीक्षा प्राप्त भक्तों के लिए यह महाप्रसाद के समान है।
किन स्थानों का नैवेद्य ग्रहण नहीं करना चाहिए?
जहाँ चाण्डालों का अधिकार हो, वहाँ का नैवेद्य ग्रहण नहीं करना चाहिए।
शुद्ध स्थानों पर प्रतिष्ठित शिवलिंग का नैवेद्य ग्रहण करना पुण्यदायक होता है।
बिल्व वृक्ष की पूजा का महत्व
बिल्व वृक्ष भगवान शिव का ही स्वरूप माना जाता है। देवताओं द्वारा इसकी स्तुति की गई है। तीनों लोकों में स्थित समस्त तीर्थ इस वृक्ष में निवास करते हैं।
बिल्व पूजन के लाभ:
बिल्व की जड़ पर जल चढ़ाने से संपूर्ण तीर्थ स्थलों में स्नान का पुण्य प्राप्त होता है।
भगवान शिव बिल्व की जड़ों में जल अर्पण करने से अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
बिल्व की जड़ में दीपक जलाने से सभी पापों का नाश हो जाता है।
इस वृक्ष के नीचे एक शिवभक्त ब्राह्मण को भोजन कराने से करोड़ों ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य प्राप्त होता है।
इस वृक्ष के नीचे दूध-घी में पके अन्न का दान देने से दरिद्रता समाप्त होती है।
प्रवृत्ति और निवृत्ति मार्ग
प्रवृत्ति मार्ग:
पूजा-पाठ द्वारा इच्छित मनोरथ की पूर्ति होती है।
अभिषेक के पश्चात अगहनी चावल से बने नैवेद्य को अर्पण करना चाहिए।
पूजा के अंत में शिवलिंग को पवित्र स्थान में स्थापित कर पूजन करना चाहिए।
निवृत्ति मार्ग:
भिक्षा में प्राप्त भोजन को नैवेद्य के रूप में अर्पण करें।
विभूति से पूजन करें और विभूति को ही नैवेद्य के रूप में समर्पित करें।
पूजा के उपरांत शिवलिंग को मस्तक पर धारण करें।
निष्कर्ष
शिव नैवेद्य ग्रहण करना भक्तों के लिए पुण्यकारी होता है, बशर्ते कि वह पवित्र स्थानों से प्राप्त हो। बिल्व वृक्ष की पूजा से शिव कृपा प्राप्त होती है, और इसका पूजन करने वाला व्यक्ति निश्चित रूप से मोक्ष पाता है। शास्त्रों में वर्णित इन विधियों को अपनाकर शिवभक्त अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं।
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