सर्वदेव कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्र (पीडीएफ) | Shri Lakshmi Stotra written by Sarvadev (PDF)

सर्वदेव कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्र – सम्पूर्णता, समृद्धि और सौभाग्य का स्तोत्र

श्री लक्ष्मी स्तोत्र, जिसे सभी देवताओं ने मिलकर रचा है, माता लक्ष्मी के प्रति भक्तिभाव और उनकी महिमा का अद्वितीय स्तवन है। इसमें देवी लक्ष्मी के विभिन्न रूपों और उनके द्वारा जगत को प्रदान की गईं समृद्धि का उल्लेख किया गया है। यह स्तोत्र भक्तों के लिए न केवल भक्ति मार्ग है, बल्कि उनका मार्गदर्शन भी करता है, जिससे वे देवी लक्ष्मी की कृपा से अपनी सभी इच्छाओं की पूर्ति कर सकते हैं।

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श्री लक्ष्मी स्तोत्र के श्लोक और उनका अर्थ

  • क्षमस्व भगवत्यम्ब क्षमा शीले परात्परे।
हे भगवती लक्ष्मी, जो क्षमाशील और परमेश्वरी हैं, आप हमें क्षमा करें।
  • उपमे सर्व साध्वीनां देवीनां देव पूजिते।
आप सभी साध्वी स्त्रियों में उत्तम और देवताओं द्वारा पूज्य हैं। आपके बिना यह सम्पूर्ण जगत निष्फल और मृत समान है।
  • कैलासे पार्वती त्वञ्च क्षीरोधे सिन्धु कन्यका।
आप कैलास में पार्वती के रूप में, समुद्र में सिन्धुकन्या के रूप में और मृत्युलोक में मर्त्य लक्ष्मी के रूप में हैं।
  • कृष्ण प्राणाधि देवीत्वं गोलोके राधिका स्वयम्।
गोलोक में आप श्रीकृष्ण की प्रिय राधा के रूप में और रासलीला में रासेश्वरी के रूप में पूजित हैं।
  • राजलक्ष्मीः राज गेहे गृहलक्ष्मी र्गृहे गृहे।
राजमहलों में राजलक्ष्मी और हर घर में गृहलक्ष्मी के रूप में आपका अधिपत्य है।

स्तोत्र का फल (फलश्रुति)

श्री लक्ष्मी स्तोत्र में यह भी बताया गया है कि जो व्यक्ति इस स्तोत्र का नित्य पाठ करता है, उसे भौतिक और आध्यात्मिक सभी प्रकार की सफलताएं मिलती हैं। यह स्तोत्र व्यक्ति को वैवाहिक सुख, संतान सुख, आर्थिक समृद्धि और यश प्रदान करता है।

  • अभार्यो लभते भार्यां - अविवाहित व्यक्ति को सुशील और सुंदर पत्नी मिलती है।
  • अपुत्रो लभते पुत्रं - संतानहीन व्यक्ति को पुत्र प्राप्त होता है।
  • धन भ्रष्टो धनं लभेत् - आर्थिक समस्याओं का समाधान मिलता है और खोई हुई संपत्ति पुनः प्राप्त होती है।

श्री लक्ष्मी स्तोत्र का महत्व

सर्वदेव कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्र का नियमित पाठ:
  • जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।
  • सभी दुखों और संतापों को हरता है।
  • प्रतिष्ठा, कीर्ति और मानसिक शांति प्रदान करता है।
सर्वदेव कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्र के पाठ की विधि विशेष रूप से सरल और प्रभावशाली है। इस स्तोत्र का नियमित और विधिवत पाठ करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, जो घर में सुख-समृद्धि, शांति और वैभव प्रदान करती हैं। इसे पाठ करने की विधि इस प्रकार है:

श्री लक्ष्मी स्तोत्र पाठ विधि

शुद्धता का ध्यान:
  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पाठ के लिए घर का एक साफ और शांत स्थान चुनें।

पूजा सामग्री:

  • एक छोटी चौकी (आसन) पर माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र रखें।
  • दीपक, धूप, चंदन, तिलक, पुष्प, फल, मिठाई और जल पात्र रखें।

माता लक्ष्मी की स्थापना:

  • लक्ष्मी जी का ध्यान करें और उन्हें निमंत्रण देकर अपने पूजन स्थल पर विराजमान करें।

दीप प्रज्वलित करें:

  • घी या तेल का दीपक जलाकर लक्ष्मी जी के समक्ष रखें।

ध्यान और प्रार्थना:

  • आंखें बंद करके कुछ क्षणों के लिए माता लक्ष्मी का ध्यान करें। उनसे कृपा और आशीर्वाद प्राप्ति की प्रार्थना करें।
श्री लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ:
  • अब श्रद्धा और भक्ति के साथ सर्वदेव कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें। इसे कम से कम 3 बार या 11 बार पाठ करना उत्तम माना गया है।

प्रसाद अर्पण:

  • पाठ के पश्चात लक्ष्मी जी को फल, मिठाई या कोई विशेष प्रसाद अर्पित करें।
आरती और समर्पण:
  • लक्ष्मी जी की आरती करें और प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन में सुख-समृद्धि और धन का वास बनाए रखें।
प्रसाद वितरण:
  • पूजा समाप्ति के बाद, अर्पित प्रसाद को सभी परिजनों में बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।
नियमितता:
  • इस स्तोत्र का नियमित, विशेष रूप से शुक्रवार को, पाठ करने से लक्ष्मी जी की कृपा और विशेष फल की प्राप्ति होती है। यदि इसे नित्य प्रातः किया जाए तो अधिक लाभकारी होता है।

विशेष सुझाव

  • संकल्प: पाठ से पहले मन में संकल्प लें कि आप इसे माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए कर रहे हैं।
  • मानसिक शुद्धता: पाठ के दौरान और उसके बाद विचारों को पवित्र और सकारात्मक बनाए रखें।
  • अवधि: विशेष रूप से दीपावली, धनतेरस, अक्षय तृतीया, और शुक्रवार के दिन इस स्तोत्र का पाठ करने से लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

सर्वदेव कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्र का यह पाठ विधिपूर्वक और भक्ति भाव से किया जाए तो व्यक्ति के जीवन में सभी प्रकार की समृद्धि और सुख-शांति का आगमन होता है।

नोट: इस स्तोत्र का पाठ प्रातःकाल करने से विशेष फल मिलता है।

श्री लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को अनेक लाभ मिलते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख लाभ दिए गए हैं:

  • धन और समृद्धि की प्राप्ति:
लक्ष्मी जी धन, समृद्धि, और ऐश्वर्य की देवी मानी जाती हैं। इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से घर में आर्थिक समृद्धि का वास होता है।
  • शांति और संतोष:
यह स्तोत्र मानसिक शांति और संतोष प्रदान करता है। पाठ करने से व्यक्ति के मन में सकारात्मकता और विश्वास की भावना बढ़ती है।
  • कष्टों का नाश:
यह स्तोत्र कष्टों और समस्याओं को दूर करने में सहायक है। इसे पढ़ने से शोक और संताप का नाश होता है।
  • सुखद दांपत्य जीवन:
इसे पढ़ने से दांपत्य जीवन में सुख और सामंजस्य बढ़ता है। अविवाहितों के लिए यह विवाह में सफलता दिलाने का माध्यम बनता है।
  • सफलता की प्राप्ति:
इस स्तोत्र के पाठ से कार्य में सफलता और यश की प्राप्ति होती है। यह विशेष रूप से व्यवसायियों और विद्यार्थियों के लिए लाभदायक है।
  • आरोग्य और स्वास्थ्य:
यह स्तोत्र मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। इसके पाठ से व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • शुभता और मंगल:
लक्ष्मी स्तोत्र को पढ़ने से जीवन में शुभता और मंगल का संचार होता है। इससे सभी प्रकार के मङ्गल कार्यों में सफलता मिलती है।
  • आध्यात्मिक विकास:
नियमित पाठ से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है और वह भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ता है।
  • सम्पूर्ण कल्याण:
इस स्तोत्र का पाठ समस्त देवताओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है, जिससे सभी देवताओं की कृपा एक साथ मिलती है। इन लाभों के कारण, श्री लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने की सलाह दी जाती है। इसका नियमित पाठ न केवल भौतिक लाभ प्रदान करता है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक सुख भी देता है।

सर्वदेव कृत श्री लक्ष्मी स्तोत्र ! Shri Lakshmi Stotra written by Sarvadev !

क्षमस्व भगवत्यम्ब क्षमा शीले परात्परे।
शुद्ध सत्व स्वरूपेच कोपादि परि वर्जिते॥

उपमे सर्व साध्वीनां देवीनां देव पूजिते।
त्वया विना जगत्सर्वं मृत तुल्यञ्च निष्फलम्।

सर्व सम्पत्स्वरूपात्वं सर्वेषां सर्व रूपिणी।
रासेश्वर्यधि देवीत्वं त्वत्कलाः सर्वयोषितः॥

कैलासे पार्वती त्वञ्च क्षीरोधे सिन्धु कन्यका।
स्वर्गेच स्वर्ग लक्ष्मी स्त्वं मर्त्य लक्ष्मीश्च भूतले॥

वैकुण्ठेच महालक्ष्मीः देवदेवी सरस्वती।
गङ्गाच तुलसीत्वञ्च सावित्री ब्रह्म लोकतः॥

कृष्ण प्राणाधि देवीत्वं गोलोके राधिका स्वयम्।
रासे रासेश्वरी त्वञ्च बृन्दा बृन्दावने वने॥

कृष्ण प्रिया त्वं भाण्डीरे चन्द्रा चन्दन कानने।
विरजा चम्पक वने शत शृङ्गेच सुन्दरी।

पद्मावती पद्म वने मालती मालती वने।
कुन्द दन्ती कुन्दवने सुशीला केतकी वने॥

कदम्ब माला त्वं देवी कदम्ब कानने पिच।
राजलक्ष्मीः राज गेहे गृहलक्ष्मी र्गृहे गृहे॥

इत्युक्त्वा देवतास्सर्वाः मुनयो मनवस्तथा।
रूरूदुर्न म्रवदनाः शुष्क कण्ठोष्ठ तालुकाः॥

इति लक्ष्मी स्तवं पुण्यं सर्वदेवैः कृतं शुभम्।
यः पठेत्प्रातरुत्थाय सवैसर्वं लभेद्ध्रुवम्॥

अभार्यो लभते भार्यां विनीतां सुसुतां सतीम्।
सुशीलां सुन्दरीं रम्यामति सुप्रियवादिनीम्॥

पुत्र पौत्र वतीं शुद्धां कुलजां कोमलां वराम्।
अपुत्रो लभते पुत्रं वैष्णवं चिरजीविनम्॥

परमैश्वर्य युक्तञ्च विद्यावन्तं यशस्विनम्।
भ्रष्टराज्यो लभेद्राज्यं भ्रष्ट श्रीर्लभेते श्रियम्॥

हत बन्धुर्लभेद्बन्धुं धन भ्रष्टो धनं लभेत्॥
कीर्ति हीनो लभेत्कीर्तिं प्रतिष्ठाञ्च लभेद्ध्रुवम्॥

सर्व मङ्गलदं स्तोत्रं शोक सन्ताप नाशनम्।
हर्षानन्दकरं शाश्वद्धर्म मोक्ष सुहृत्पदम्॥

॥ इति सर्व देव कृत लक्ष्मी स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

निष्कर्ष

इस स्तोत्र का नित्य पाठ करना सौभाग्य, समृद्धि और शांति प्राप्त करने का मार्ग है। इसे श्रद्धा भाव से पढ़ने से भक्त को लक्ष्मीजी की कृपा प्राप्त होती है और उनके जीवन से सभी प्रकार की समस्याओं का निवारण होता है।

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