श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र (PDF) | Shri Vishnu Ashtottara Shatnam Stotra (PDF)

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र (PDF)

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र भगवान विष्णु के 108 नामों का स्तोत्र है, जिसे महान ऋषि वेद व्यास ने रचा है। यह स्तोत्र विष्णु पुराण में वर्णित है और इसकी महिमा असीमित है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कई समस्याओं का समाधान होता है।

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का महत्व

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा में किया जाता है। इसे प्रात: समय में अथवा विशेष रूप से गुरुवार के दिन पढ़ने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। घर में संतानहीनता का सामना करने वालों के लिए यह स्तोत्र अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह स्तोत्र महाभारत, पद्म पुराण और मत्स्य पुराण में विभिन्न रूपों में उपलब्ध है और इसके हर नाम से भगवान विष्णु के अनगिनत गुणों का परिचय मिलता है।

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र पाठ की विधि

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का सही विधि से पाठ करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इसका पाठ करने से मानसिक शांति, समृद्धि, संतान सुख और पापों से मुक्ति मिलती है। नीचे दी गई विधि से इस स्तोत्र का पाठ करें:

  1. स्थान और तैयारी:

    • सबसे पहले, एक स्वच्छ और शांत स्थान चुनें, जहाँ पर किसी प्रकार का विघ्न न हो।
    • एक आसन पर बैठ जाएं और ध्यान करें।
    • भगवान विष्णु की पूजा में श्रद्धा से उनके चित्र या प्रतिमा को रखें।
    • भगवान विष्णु के चित्र के पास दीपक और अगरबत्ती रखें।
    • स्नान करके स्वच्छ होकर पूजा स्थल पर जाएं और भगवान के सामने बैठ जाएं।
  2. पूजा विधि:

    • सबसे पहले, भगवान विष्णु का ध्यान करें।

      ध्यान मंत्र:
      "आधित्याय च सोमाय मंगलाय बुधाय च।
      गुरु शुक्र शनिभ्यश्च सर्व ग्रह नमो नमः।"

    • फिर, भगवान विष्णु का पंचोपचार पूजन (पानी, फूल, दीपक, धूप और नैवेद्य) करें।

  3. अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का पाठ:

    • अब, श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का पाठ 108 बार करें।

    • यह स्तोत्र 108 नामों से बना है, इसलिए इसे 108 बार जपने की परंपरा है।

      अगर समय कम हो तो 11 या 21 बार भी पाठ कर सकते हैं।

    • प्रत्येक नाम के बाद "स्वाहा" शब्द का उच्चारण करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए नामों का जप करें।

  4. माला का उपयोग:

    • अगर संभव हो, तो इस स्तोत्र के पाठ के लिए जप माला का उपयोग करें।
    • माला में 108 मनके होते हैं, जो आपको 108 नामों का जप करने में मदद करेंगे।
    • एक माला में 108 बार इस स्तोत्र का पाठ पूरा करें।
  5. आरती और समाप्ति:

    • पाठ के बाद भगवान विष्णु की आरती करें। आप "ओम जय जगदीश हरे" की आरती भी कर सकते हैं।
    • फिर, भगवान के समक्ष प्रणाम करें और आभार व्यक्त करें।
  6. प्रसाद वितरण:

    • अंत में, भगवान विष्णु के चरणों में मिठाई या फल अर्पित करें और उन्हें प्रसाद के रूप में बांटें।

विशेष समय और दिन:

  • गुरुवार: श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से गुरुवार के दिन लाभकारी माना जाता है।
  • प्रात: काल: सुबह के समय इस स्तोत्र का पाठ अधिक प्रभावी होता है।
  • मंगलमय वातावरण: पूजा करते समय नकारात्मक विचारों से दूर रहें और सकारात्मक ऊर्जा का ध्यान रखें।
इस प्रकार से श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का विधिपूर्वक पाठ करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र के नियम

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का पाठ करते समय कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना चाहिए। इन नियमों का अनुसरण करने से पाठ का फल अधिक शुभ और उत्तम मिलता है। यहाँ इस स्तोत्र के पाठ के कुछ प्रमुख नियम दिए गए हैं:


1. स्वच्छता और पवित्रता

  • स्नान करके और स्वच्छ होकर ही स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
  • पूजा स्थल को स्वच्छ रखें। घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए नकारात्मकता से बचें।

2. समय का महत्व

  • प्रात: काल (सुबह का समय) इस स्तोत्र के पाठ के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
  • गुरुवार का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे लाभकारी होता है।

3. ध्यान और एकाग्रता

  • पाठ से पहले भगवान विष्णु का ध्यान करें और उनकी दिव्य उपस्थिति का अनुभव करें।
  • पूरे पाठ के दौरान मानसिक एकाग्रता बनाए रखें। distractions से बचने का प्रयास करें।

4. मंत्र जाप की संख्या

  • 108 बार इस स्तोत्र का पाठ करना सर्वोत्तम माना जाता है।
  • 1 माला में 108 मनके होते हैं, जिनसे 108 बार नामों का जाप करने में मदद मिलती है।
  • अगर समय कम हो, तो 11 या 21 बार भी जाप किया जा सकता है, लेकिन 108 बार का पाठ अधिक प्रभावी होता है।

5. माला का उपयोग

  • जप माला का उपयोग करना इस स्तोत्र के जाप के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
  • माला का उपयोग करते समय हर नाम पर एक मनका घुमाएं और "स्वाहा" का उच्चारण करें।

6. व्रत और उपवास

  • यदि संभव हो, तो व्रत रखें और उपवासी होकर इस स्तोत्र का पाठ करें।
  • यह विशेष रूप से मानसिक और आत्मिक शुद्धता को बढ़ाता है।

7. संतान सुख के लिए

  • संतान सुख के इच्छुक लोग विशेष रूप से प्रति दिन इस स्तोत्र का पाठ करें।
  • इस स्तोत्र का जाप संतानहीनता के समाधान के रूप में अत्यधिक प्रभावी होता है।

8. भगवान विष्णु का ध्यान

  • पाठ के पहले और बाद में भगवान विष्णु का ध्यान करें और उनका नमस्कार करें।
  • भगवान के गुणों का ध्यान करते हुए जाप करें, ताकि मन में विशुद्धता और भक्ति का उदय हो।

9. उचित आसन और स्थान

  • पूर्व या उत्तर की दिशा में मुंह करके बैठें।
  • एक स्वच्छ आसन पर बैठकर, शांतिपूर्ण वातावरण में पाठ करें।
10. इष्ट देवता का आशीर्वाद
  • पाठ के अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
  • भगवान विष्णु के चरणों में प्रसाद अर्पित करें और प्रसाद सभी भक्तों को बांटें।

11. मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए

  • यदि आपके पास किसी विशेष समस्या का समाधान चाहिए, तो नियत समय पर लगातार 21 दिनों तक इस स्तोत्र का पाठ करें।
  • मनोकामना पूरी होने पर भगवान को धन्यवाद अर्पित करें और उनके प्रति आभार व्यक्त करें।

12. किसी के प्रति अपशब्द का प्रयोग न करें

  • भगवान के भक्तों के प्रति सद्भाव रखें। दूसरों को कोई भी दुख या अपशब्द न कहें।
  • भक्ति का रास्ता शुद्ध और सही आचरण से ही निर्मित होता है।

इन नियमों का पालन करके आप श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र के जाप का सर्वोत्तम लाभ प्राप्त कर सकते हैं। नियमों के अनुसार पाठ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र के लाभ

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भक्तों को कई प्रकार के शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। यह स्तोत्र भगवान विष्णु के 108 दिव्य नामों का स्तोत्र है, जो भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होता है।

1. मानसिक शांति और संतुलन

  • इस स्तोत्र के जाप से मन की शांति मिलती है। विष्णु जी के 108 नामों का उच्चारण मानसिक तनाव और चिंताओं को दूर करता है।
  • यह मानसिक तनाव को कम करने, ध्यान केंद्रित करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है।

2. समृद्धि और धन की प्राप्ति

  • विष्णु भगवान की पूजा से घर में समृद्धि का वास होता है।
  • यह स्तोत्र व्यापार, नौकरी और आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में सहायक है।
  • जो लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, उन्हें इस स्तोत्र का जाप विशेष रूप से लाभकारी होता है।

3. संतान सुख की प्राप्ति

  • जिन परिवारों में संतान का सुख नहीं मिल रहा है, वे इस स्तोत्र का नियमित जाप करें।
  • भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप संतान सुख के इच्छुक दंपत्तियों के लिए बहुत लाभकारी होता है।

4. पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति

  • इस स्तोत्र का जाप पापों को नष्ट करता है और पुण्य की वृद्धि करता है।
  • यह स्तोत्र सभी प्रकार के पापों से मुक्ति पाने के लिए उत्तम माना जाता है और व्यक्ति को शुद्धता की ओर अग्रसर करता है।

5. जीवन में सफलता और समृद्धि

  • जीवन में किसी भी प्रकार की विफलता और कठिनाइयों को दूर करने के लिए यह स्तोत्र बेहद प्रभावी है।
  • यह स्तोत्र परिवार में सुख-शांति, सौहार्द और समृद्धि लाने में मदद करता है।

6. मोक्ष की प्राप्ति

  • जो व्यक्ति इस स्तोत्र का भक्ति भाव से जाप करते हैं, वे भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति करते हैं।
  • यह स्तोत्र आत्मा के उद्धार के लिए भी अत्यंत प्रभावी है।

7. रोगों से मुक्ति

  • जो लोग शारीरिक और मानसिक रोगों से परेशान हैं, उन्हें इस स्तोत्र का जाप करने से राहत मिलती है।
  • यह शरीर में ऊर्जा और स्फूर्ति का संचार करता है, जिससे व्यक्ति का स्वास्थ्य बेहतर होता है।

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र

वासुदेवं हृषीकेशं वामनं जलशायिनम्।
जनार्दनं हरिं कृष्णं श्रीवक्षं गरुड़ध्वजम् ॥ 1॥

वाराहं पुण्डरीकाक्षं नृसिंहं नरकंटकम्।
अव्यक्तं शाश्वतं विष्णुमनन्तमजमव्ययम् ॥ 2॥

नारायणं गदाध्यक्षं गोविंदं कीर्तिभजनम्।
गोवर्धनोद्धारं देवं भूधरं भुवनेश्वरम् ॥ 3॥

वेत्तरं यज्ञपुरुषं यज्ञेशं यज्ञवाहनम्।
चक्रपाणिं गदापाणिं शंखपाणिं नरोत्तमम् ॥ 4॥

वैकुण्ठं दुष्ठदमनं भुगर्भं पीतवाससम।
त्रिविक्रमं त्रिकालज्ञानं त्रिमूर्तिं नंदकेश्वरम् ॥ 5॥

रामं रामं हयग्रीवं भीमं रौद्रं भावोद्भवम्।
श्रीपतिं श्रीधरं श्रीशं मंगलं मंगलायुधम् ॥ 6॥

दामोदरं दमोपेटं केशवं केशिसुदानम्।
वरेण्यं वरदं विष्णुनन्दं वासुदेवजम् ॥ 7॥

हिरण्यरेतसं दीप्तं पुराणं पुरूषोत्तमम्।
सकलं निष्कलं शुद्धं निर्गुणं गुणशाश्वतम ॥ 8॥

हिरण्यतनुससंकाशं सूर्ययुत्समप्रभम्।
मेघश्यामं चतुर्बाहुं कुशलं कमलक्षणम् ॥ 9॥

ज्योतिरूपमरूपं च स्वरूपं रूपसंस्थितम्।
सर्वज्ञं सर्वरूपस्थं सर्वेषां सर्वतोमुखम् ॥ 10॥

ज्ञानं कुष्ठमचलं ज्ञानदं परमं प्रभुम्।
योगिशं योगनिशानतं योगिसंयोगरूपिणम् ॥ 11।

ईश्वरं सर्वभूतानां वन्दे भूतमयं प्रभुम्।
इति नमशतं दिव्यं वैष्णवं खलु पापहम् ॥ 12॥

व्यासेन कथितं पूर्वं सर्वपाप्रणाशनम्।
यः पथेत प्रातरुत्थाय स भवेद् वैष्णवो नरः ॥ 13॥

सर्वपापविशुद्धात्मा विष्णुसायुज्यमाप्नुयात्।
चन्द्रायणसहस्राणी कन्यादानशतानि च ॥ 14॥

गावं लक्षसहस्राणी मुक्तिभागी भवेन्नरः।
अश्वमेधायुतं पुण्यं फलं प्राप्नोति मानवः ॥ 15॥

॥ इति श्रीविष्णुपुराणे श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनास्तोत्रम् ॥


निष्कर्ष (Conclusion)

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र न केवल भगवान विष्णु के 108 नामों का स्तुति है, बल्कि यह भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली एक शक्तिशाली साधना है। इसके नियमित पाठ से मानसिक शांति, समृद्धि, संतान सुख, और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र हर किसी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने के लिए अत्यंत लाभकारी है।

जो व्यक्ति इसके जाप में समर्पण और श्रद्धा रखते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और उनके जीवन में हर दिशा में सफलता की प्राप्ति होती है। इस स्तोत्र का जाप करने से किसी भी प्रकार की मानसिक, शारीरिक या आध्यात्मिक समस्याओं का समाधान होता है।

इसलिए, श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का जाप निश्चित रूप से एक व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कराने वाला और जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता लाने वाला है।

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